नगर पंचायत डुमरियागंज के जिम्मेदारों की उदासीनता गांधी नगर वार्ड के लोगों पर भारी पड़ रही

सिद्धार्थनगर : नगर पंचायत डुमरियागंज के जिम्मेदारों की उदासीनता गांधी नगर वार्ड के लोगों पर भारी पड़ रही है। जलनिकासी का उचित इंतजाम मोहल्ले में न होने के कारण आधे डुमरियागंज कस्बे का पानी एक खाली प्लाट में जमा है। अब यही गंदा पानी रिसकर लोगों के घरों में पहुंच रहा है। मामले की शिकायत कमिश्नर से भी हुई, लेकिन जिम्मेदारों अनजान बने है।


डुमरियागंज- बांसी मार्ग स्थित एचडीएफसी बैंक के ठीक सामने लगभग दो दर्जन घरों के लोग परेशान हैं, क्योंकि उनके घर के निचले तल में नालियों का गंदा पानी भर रहा है। कस्बे में जलनिकासी के लिए जो नाला बनाया गया उसमें से एक रास्ता गांधीनगर के पूर्वी हिस्से में निकाला गया है। नाले से होकर गंदा पानी अबतक एक खाली प्लाट में गिरता था। उसके बनवाया जा रहा है जिसके चलते पानी आगे नहीं निकल पा रहा है और एक जगह एकत्रित होता है। पानी न निकलने के चलते मोहल्ले के दर्जनों घर के लोग परेशान हैं। बदबू भरा माहौल तो अलग है घर के निचली मंजिलों में यह गंदा पानी भरने लगा है। किराए पर दुकान चलाने वाले लोगों के जरूरी समान दुकान में पानी भरने के चलते बर्बाद हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर ही नहीं कमिश्नर तक से समस्या की शिकायत हुई, बावजूद कोई ध्यान देने वाली नहीं। एसडीएम त्रिभुवन ने कहा कि राजस्व टीम व नपं को निर्देशित किया गया है कि गंदे पानी के निस्तारण की व्यवस्था शीघ्र करें।


गंदे पानी से बीमारियों का भय


- पिछले चार महीने से जिस कदर जलजमाव की समस्या से मोहल्ला वासी जूझ रहे हैं यह पीड़ा कोई नहीं समझने वाला। गंदे पानी से संक्रामक बीमारियों के फैलने का भय सता रहा है।- रमजान अली


 


- नगर पंचायत की लापरवाही दुकानदारों पर भारी पड़ रही है। यहां कापी किताब व इलेक्ट्रिक की दुकाने हैं। दुकानों में पानी भरने के चलते दुकानदारों को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है।- मनोज कुमार


- जब मोहल्ले में जल निस्तारण के लिए सरकारी जमीन ही नहीं है तो नाले का रुख मोहल्ले की तरफ बेवजह किया गया है। इससे बेहतर यह होता कि इस मार्ग को अवरुद्ध कर पानी मुख्य नाले में गिराया जाता और पानी कस्बे से बाहर निकल जाता।- मो. माजिद


- मोहल्ले के लोग काफी दिनों से परेशान हैं। गंदा पानी घरों में भरने से बदबू भरा माहौल रहता है जिसमें सांस लेना भी मुश्किल है। नगर पंचायत में कई बार शिकायतीपत्र दिया गया। कमिश्नर को भी पत्र भेजा गया। कोई सुनने वाला नहीं है।- अब्दुल्ला निजामी